Welcome to VYAS TIME NEWS   Click to listen highlighted text! Welcome to VYAS TIME NEWS
क्राइमदिल्ली NCRदुनियामध्य प्रदेश

3200करोड़ रुपए का विशाल निवेश घोटाला भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्य लोगो को क्यों नहीं पकड़ पा रही पुलिस

आइए जानते है क्या है पूरा मामला

3200करोड़ रुपए का विशाल निवेश घोटाला भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्य लोगो को क्यों नहीं पकड़ पा रही पुलिस

आइए जानते है क्या है पूरा मामला

*विशेष संवाददाता भोपाल मध्यप्रदेश* 3200 करोड़ रुपये का विशाल निवेश घोटाला (Invest Scam) आधुनिक भारत के सबसे बड़े और संगठित डिजिटल वित्तीय अपराधों में से एक है।यह आंकड़ा और भी कई गुना बड़ा है! लवीश चौधरी (उर्फ नवाब) और उसके सहयोगियों ने तकनीक, फर्जी बैंकिंग नेटवर्क और लुभावने वादों का ऐसा मकड़जाल बुना जिसने देश के कई राज्यों को अपनी चपेट में ले लिया
*नीचे इस पूरे घोटाले का राज्य-वार विस्तृत विश्लेषण दिया गया है*
1.मास्टरमाइंड और संगठित सिंडिकेट का ढांचा इस पूरे घोटाले का केंद्र लवीश चौधरी है जो की वर्तमान में दुबई से अपना नेटवर्क चला रहा है उसने कानून से बचने के लिए एक बहु-स्तरीय ढांचा तैयार किया गया था शीर्ष नेतृत्व लवीश चौधरी (दुबई) और ऋषिकेश राय (नोएडा) ऑपरेशनल हेड: हरिंदर पाल सिंह (सिंह ब्रदर्स टीम का प्रमुख) और नवाब हसन (ब्लू डायमंड एग्जीक्यूटिव), जो भारत में एजेंटों के विशाल नेटवर्क को नियंत्रित करते थे।
ब्रांड्स का जाल: ठगी के लिए एक ही गिरोह ने QFX, YFX (Yorker FX), BotBro, BotAlpha, Crossalpha, और Minecrypto जैसे कई ऐप्स और वेबसाइटों का उपयोग किया गया है
2.देशव्यापी जाल
प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एसटीएफ की जांच के अनुसार, यह घोटाला पूरे भारत में फैला हुआ है। मुख्य रूप से कई राज्यों में FIR दर्ज की गई हैं जैसे की हिमाचल प्रदेश प्रारंभिक केंद्र सोलन और शिमला सहित कई जिलों में दर्जनों FIR दर्ज सबसे पहले QFX के खिलाफ जांच शुरू हुई उत्तर प्रदेश (UP) संचालन केंद्र नोएडा, शामली और मेरठ में मुख्य मामले दर्ज है
‘ब्लू डायमंड’ एजेंट नवाब हसन शामली से गिरफ्तार गिरफतार किया गया था मध्य प्रदेश (MP) एसटीएफ सक्रिय भोपाल और इंदौर में बड़े स्तर पर मामले दर्ज हुए थे
मुख्य आरोपी ऋषिकेश राय को नोएडा से MP एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया हरियाणा रोहतक और गुरुग्राम में प्रमुख एजेंटों के खिलाफ FIR दर्ज है
ED द्वारा रोहतक में संपत्तियों की कुर्की और छापेमारी जारी है दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी में शेल कंपनियों और उनके ऑफिसों पर केस दर्ज है ₹170 करोड़ के बैंक खाते दिल्ली-नोएडा बेल्ट से सीज हुए हैं असम उत्तर-पूर्व भारत का मुख्य केंद्र,जहाँ निवेशकों के खिलाफ करोड़ों की ठगी की FIR दर्ज कराई गई थी ED ने असम पुलिस की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू कर दी है पंजाब, लुधियाना और अमृतसर में एजेंटों के खिलाफ शिकायतें दर्ज है गिरोह की अचल संपत्तियों की कुर्की की गई।
3.शेल कंपनियों और लेनदेन का ब्यौरा (₹3200 करोड़ का गणित) जांच में 185 से अधिक फर्जी कंपनियों की पहचान हुई है। इन कंपनियों के बैंक खातों में हुए लेनदेन ने देश की बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं रेनेट टेक्नोलॉजी (नोएडा): सर्वाधिक ₹2062 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन किंडेंट बिजनेस सॉल्यूशन: लगभग ₹734 करोड़ का ट्रांजैक्शन किया गया है टाइगर डिजिटल और NPAY बॉक्स: क्रमशः ₹170 करोड़ और ₹150 करोड़ से अधिक का लेनदेन है। मनी लॉन्ड्रिंग का तरीका भारत में जमा किए गए पैसे को USDT (क्रिप्टो) में बदला गया और लवीश चौधरी के दुबई स्थित वॉलेट्स में भेज दिया गया।
4.झारखंड और बिहार का गहरा कनेक्शन
यद्यपि मुख्य FIR उत्तर भारत में थीं लेकिन झारखंड और बिहार इस गिरोह के लिए सबसे बड़े ‘फंडिंग ग्राउंड’ रहे हैं झारखंड: रांची,धनबाद और बोकारो में स्थानीय लीडरों ने बड़े बड़े होटलों में सेमिनार कर करोड़ों का निवेश कराया गया है राँची साइबर सेल में पीड़ितों ने मामला दर्ज कराया गया था कि उन्हें 5-6% मासिक रिटर्न का झांसा दिया गया था बिहार: पटना और दरभंगा क्षेत्र में ‘टीएलसी कॉइन’ और ‘QFX’ के माध्यम से हजारों लोग ठगे गए थे यहाँ के मुख्य अकाउंट्स’ का उपयोग पैसा लेयरिंग के लिए किया गया था
5.अब तक का सबसे बड़ा एक्शन (अगस्त 2025 – फरवरी 2026)एजेंसियों ने इस सिंडिकेट की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए सख्त कदम उठाए हैं जिसमे ऋषिकेश राय, हरिंदर पाल सिंह और नवाब हसन सहित 16 मुख्य आरोपी को हिरासत में लिया गया हैं संपत्ति कुर्की ED ने ₹9.31करोड़ की 45 अचल संपत्तियां (फ्लैट, प्लॉट, कृषि भूमि) कुर्क की हैं फंड फ्रीजिंग विभिन्न राज्यों की 185 शेल कंपनियों के खातों में जमा लगभग ₹400 करोड़ सीज किए जा चुके हैं इंटरपोल और प्रत्यर्पण लवीश चौधरी के खिलाफ लुकआउट नोटिस और रेड कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया जारी है ताकि उसे दुबई से प्रत्यर्पित किया जा सके।
6.शेल कंपनियों का साम्राज्य (50+ फर्जी कंपनियां)जांच एजेंसियों (ED और STF) ने पाया कि नोएडा और लखनऊ के कुछ ही पतों पर 185 से अधिक फर्जी कंपनियां पंजीकृत थीं। इनका कोई वास्तविक व्यापार नहीं था, ये केवल ‘मनी पाइपलाइन के रूप में काम कर रही थीं प्रमुख कंपनियां और उनके डायरेक्टर्स रेनेट टेक्नोलॉजी प्रा. लि.(डायरेक्टर ऋषिकेश राय) यह गिरोह की मुख्य ‘कलेक्शन’ एजेंसी थी किंडेंट बिजनेस सॉल्यूशन एक ही पते से संचालित दूसरी बड़ी इकाई है टाइगर डिजिटल सर्विसेज: इसका उपयोग ‘डिजिटल गेटवे’ के रूप में किया गया था NPAY बॉक्स और मूल बिजनेस सॉल्यूशंस: निवेश को अलग-अलग लेयर्स में बांटने के लिए उपयोग किया गया था डमी डायरेक्टर्स: इन कंपनियों में झुग्गियों या गांवों में रहने वाले लोगों को मामूली पैसों के बदले ‘पेपर डायरेक्टर’ बनाया गया था।
7.ट्रांजैक्शन और बैंकिंग डेटा का विश्लेषण रेनेट टेक्नोलॉजी HDFC, ICICI (नोएडा) ₹2062 करोड़
किंडेंट बिजनेस यस बैंक, एक्सिस बैंक ₹734 करोड़
टाइगर डिजिटल आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ₹170+ करोड़
NPAY बॉक्स कोटक महिंद्रा बैंक ₹150+ करोड़ एवम अन्य 180+ इकाइयां विभिन्न बैंक ₹100+ करोड़ से अधिक पैसे की लेयरिंग जब कोई निवेशक ₹1 लाख निवेश करता, तो उसे तुरंत194अलग-अलग ‘म्यूल’ (किराए के) खातों मे ₹5,000-₹5,000 करके ट्रांसफर करवा दिया जाता था ताकि इनकम टैक्स और बैंकिंग सुरक्षा सॉफ्टवेयर की नजर से बचा जा सके।
8.झारखंड और बिहार में ठगी का जाल
इन राज्यों में गिरोह ने ‘एरिया प्रमोटर्स’ के जरिए गाँवों तक पहुँच बनाई थी कार्यप्रणाली: बड़ी बड़ी होटलों में सेमिनार, जूम मीटिंग्स और आलीशान लाइफस्टाइल दिखाकर लोगों को यह यकीन दिलाया गया कि ‘BotBro’ का AI रोबोट उनके लिए विदेशी मुद्रा (Forex) में ट्रेड कर रहा है झारखंड रांची, धनबाद और बोकारो, हजारीबाग में हजारों शिकायतें दर्ज है
स्थानीय एजेंटों ने निवेशकों से न केवल ऑनलाइन बल्कि भारी मात्रा में कैश भी लिया था बिहार पटना और मिथिलांचल क्षेत्र में ‘टीएलसी कॉइन’ और ‘QFX’ के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी हुई।
9.मनी लॉन्ड्रिंग और दुबई कनेक्शन बैंकिंग ट्रेल से पता चला है कि भारत के बैंकों में आया पैसा वहां ज्यादा समय तक नहीं रहा है P2P मेथड: शेल कंपनियों के खातों से पैसा निकालकर USDT (Binance क्रिप्टो करेंसी) खरीदी गई डिजिटल वॉलेट यह क्रिप्टो सीधे लवीश चौधरी के दुबई स्थित वॉलेट्स में ट्रांसफर कर दी गई थी इस पैसे का इस्तेमाल दुबई में लग्जरी फ्लैट्स, स्पोर्ट्स कार और अन्य संपत्तियां खरीदने में किया गया।
10.वर्तमान कानूनी स्थिति और एक्शन गिरफ्तारी ऋषिकेश राय समेत 16 लोग सलाखों के पीछे हैं। ऋषिकेश से पूछताछ में 9 से ज्यादा ठिकानों पर दबिश भी दी गई है।
11.स्थानीय लीडरों पर कार्यवाही ED और STF ने मिलकर अब राज्यों के स्थानीय लीडरों/प्रमोटरों एवं उनके संपत्तियों का सूची भी तैयार कर गिरफ्तारी एवं सम्पत्तियों की कुर्की जब्ती का खाका तैयार कर लिया है इंटरपोल की मदद लवीश चौधरी को वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण’ (Extradition) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है 3200 करोड़ का घोटाला केवल एक वित्तीय ठगी नहीं है, बल्कि एक ‘साइबर सिंडिकेट’ की करतूत है गिरोह के पास आरबीआई का कोई लाइसेंस नहीं था फिर भी इन लोगो ने हजारों करोड़ का लेनदेन किया जो बैंकिंग सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करता है मामला केवल एक पोंजी स्कीम नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट की साजिश है गिरोह के पास निवेश का कोई लाइसेंस नहीं था, फिर भी 3200 करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया एजेंसियां अब उन क्षेत्रीय डायमंड लीडर्स’ की सूची तैयार कर रही हैं जिन्होंने स्थानीय स्तर पर निवेशकों को फंसाया था

अब देखना यह है की क्या भोपाल में 19 लोगो के खिलाफ एसटीएफ थाने में मामला दर्ज है उनमें से 13 लोगो को गिरफ्तार किया है बाकी जो शेष बचे हैं उनको क्यों नहीं किया गया है जिन लोगों को गिरफ्तार नहीं किया अगले अंक में उनका भी खुलासा किया जावेगा

VYAS TIME NEWS

राष्ट्रीय व्यास टाइम्स समाचार पत्र एवम VT 24 NEWS भोपाल उज्जैन मध्य प्रदेश से प्रकाशित प्रधान संपादक डॉ.आर एस व्यास भोपाल मध्यप्रदेश मोबाइल नंबर 9424655735

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!